अरे कुलक्षणी, मुहँ क्या देख रही है, ले जाओ उसे अंदर
जी
चलिए
छोड़ दो मुझे, मुझे किसि की ज़रूरत नहीं
छोड़ दो, छोड़ दो मुझे, मैं नीच हूँ, मैं नालायक़ हूँ
मुझे किसि की सहानुभूति नहीं चाहिए
सहानुभूति नहीं लेकिन सेवा तो चाहिए
हट जाओ मेरे पास से
मुझे कोई नहीं चाहिए
मै नालायक़ हूँ, मैं नीच हूँ, मैं पापी हूँ
क्या रे, भांजे, बोल न
अरे क्या हुआ, बोल ....
तेरी मामी को पत्थर गीरा था छाती में
अरे नहीं, अरे नहां भांजा, तुम क्या बोल न, बहुत चिंता हो गयी
मेरे को बहुत चिंता हो गयी
चौथी शादी कौन करेगा मेरे साथ
संता, तू क्यों रो रहा है
क्यों नहीं रोऊँ, दादा
क्या हुआ
दिल दर्द हो रहा है
अरे क्यों रो रहा है, क्यों, बताओ
तीजी शादी चल गयी
तो क्या हुआ, तीसरी गयी चौथी आएगी, चौथी गयी तो पांचवी भी आएगी, हम हैं, क्या समझा
चौथी भी आएगी
ज़रुर, हमें तो क्यों नहीं आएगी
दादाजी ....
भांजे, उसके गहने निकाल आएँ
चौथी शादी में काम आए जाएंगे
ओम नमः शिवाय
ओफ़ो, इस औरत ने तो सोने को भंग कर दिया
बंद करो यह पाखंड
ये आप क्या कह रहे हैं
ये पाखंड नहीं, पूजा है
पूजा के लिए मंदिर बने हैं, मंदिर में चल जाओ
घर में आडम्बर नहीं चलेगा
यह पत्थर भगवान नहीं बन सकता
हे प्रभु, इन्हे क्षमा कर दीजिए
स्वामी, प्रभु से क्षमा मांगिए
नहीं, सारे फ़साद की जड़ यही पत्थर है
मैं इसे उठाकर फ़ेंक दूँगा
नहीं, ऐसा मत किजिए, ऐसा मत किजिए
हट जाओ
न जाने क्या लगा रखा है
बार बार फिसल जाता है
अच्छा तो ये तंत्र-मंत्र का चमत्कार है
मैं शिवलिंग को चूर-चूर कर दुंगा
यह औरत भयानक डाइन है
मैं इसे भगाकर ही छोड़ूँगा
यह क्या हुअ, क्या मैं इतना दुरबल हो गया हूँ कि मुझसे छोटा-सा शिवलिंग नहीं उठा
या, उस्ने मेरी शक्ती क्षिण कर दी
देखता हूँ
मुझमें शक्ती है, मैं दुरबल नहीं हूँ
एक छोटा-सा शिवलिंग उठा नहीं सका तो क्या हूआ
शिवलिंग को रावण से भी नहीं उठा था, तो क्या, रावण वीर नहीं था
था, और तुम भी हो
तुम
हँ, मैं
मैं सब देख रही हूँ, और सुन भी रही हूँ
और इस नतीजे पर पहुंची हूँ, कि जिससे तुम ब्याह कर लाए हो वह अवश्य एक जादूगरनी है
इस लिए उसे दूर रहना में तुम्हारे भलाई है
तुम ठीक कहती हो, उर्वशी, लेकिन पिताजी मानेंगे नहीं
वैदजी, आप ने बताया नहीं, यह अचेत क्यों है
चंद्र उठाया मोटी भस्म, सब दवाए दे चुका हूँ, लेकिन फ़िरभी कोई प्रभाव नहीं पड़ा है
इनहे बिमारी क्या है, वैदजी
इन में इच्छा-शक्ती नहीं है, लगता है जीवन के प्रति उत्साह नहीं रहा
संत दास, चलो मेरे साथ, दवा ले लाओ
इतनी कठोर परीक्षा मत लीजिए प्रभु
बबुजी को ठीक कर दीजिए
इस घर में वही मेरी शुभ-चिंतक है, दया किजिए प्रभु
संता,
संता दवाए लेने गया है
आपको क्या चाहिए
मुझे थोड़ा सा विष दे दो
आप मुझसे ऐसी कठोर बात क्यों कर रहे हैं
सवित्रि, तुम इस घर में सत्यवान की सवित्रि नहीं
