Jai Baba Pashupatinath #8

संता,
संता दवाई लेने गया है
आपको क्या चाहिए
मुझे थोड़ा सा विष दे दो
आप मुझसे ऐसी कठोर बात क्यों कर रहे हैं
सवित्रि, तुम इस घर में सत्यवान की सवित्रि नहीं, राजा दशरथ की कैकेयी की भूमिका निभायी है
माँ बेटे ने मिल करे, मेरी प्रत्येक आभिलाषा की हो नीचे कर दली
बहू शर्दा, शर्दा
क्या आज्ञा, बाबूजी
मेरी ?अंतर? जल रही है
शायद संतु ने मुझे आज दूध नहीं दिया
मैं दूध लाती हूँ

आप कैसे हो मालिक
तुम कहाँ चले गये थे
बाबूजी, दूध लीजिए
बेटी, मुझे दे दो, मैं पिलाता हूँ
मुँह खोलिए, मालिक
उठीए, मालिक, दूध पी लीजिए

गिलास लो, बिटिया

संतु
जी, मालिक
थोड़े दिन में मेरी महा-यात्रा आरंभ होनेवाली है
मैं मर गया तो, मेरा बेटा आग न दे
मेरी पत्नी मेरा देह को न छू ले
मेरी बहू शर्दा मेरी चिता को आग देगी
समाज अगर अनुमति न दे, तुम मेरी चिता को आग दोगे

स्वामी, मेरे साथ इतना कठोर न बनिए

बाबूजी, मैं आप से प्रार्थना करती हूँ, माजी का मन न दुखाइए

माँ बेटा ने जी भरके मेरा मन दुखाये हैं
तुम लोग जाओ, मुझे आराम करने दो
जाओ

उस घर में शांती, हा हा
जो सुख-शांती मुझे तुम्हारी संगत में मिलती है, वह और कहीं नहीं मिलती
उर्वशी
कहो
तुम मुझसे कुछ माँगो नहीं
अपने से क्या माँगना, तुम तो बिना माँगने दे देते हो
चूड़ी पहने के बाद मन हो रहा है, अगर मैं तुम्हारी धर्मपत्नी होती, तो मैं भी लाल परिधान पहनकर तीज मनाती

शर्दा, कहाँ जा रहे हो
पूजा के लिए मंदिर जा रही हूँ
तुम तो घर में भी पूजा कर सकती हो
तुम्हारा ससुर बिमार है, उनके देख-रेख के लिए किसि के होना ज़रूरी है
ठीक है, आप जाइए

बहू, शर्दा
आती हूँ, पिताजी

कहिए, पिताजी
बैठो, बेटी
अपने स्वार्थ में आकर मैंने तुम्हारा ब्याह अपना नलायक बेटे से कर दिया,
जिसका मुझे बड़ा दुख है
इस के लिए, मैं अपना आपको दोषी समझता हूँ
नहीं पिताजी, नहीं
इस में आपका क्या दोष
ठहरिए, मैं आपका दवा लाती हूँ
नहीं बेटी नहीं
अब दवा की ज़रूरत नहीं
तुम मेरे पास बैठो
अब मेरे पास अधिक समय नहीं है
कहिए, पिताजी
बेटी, मुझसे वादा करो, कि इस भेद को किसि को नहीं बताओगी
मैं आपसे वादा करती हूँ, पिताजी
बेटी, यह नागमणि हमारे कुल की धरोहर है,
तुम्हारी पती को दूंगा, या पता चलेगा, तो इसे समाप्त कर देगा
इससे संभालकर रखना
किसि को पता न चलें
पिताजी, पिताजी, पिताजी
छोड़ दो मत जाइए

क्या हूआ, बहू
काका, बाबूजी हमें छोड़कर चले गए

क्या हूआ, बहू
माँजी
स्वामी ने हमें छोड़कर चलेगे
नहीं स्वामी

अरे कुलक्षणी, तू आयी, मेरा बेटा का जीवन बरबाद हो गया, और अब, तू ने मेरा सुहाग उजाड़ दिया
बेटा, इसने तेरा बाप को ताड़ लिया

संतु, इनके गले से नागमनिक निकलकर मुझे दे दो
इनके गले में तो कुछ भी नहीं, मालकीन
बता, इनके गले में नागमनी थी, वह कहाँ गयी
बेटी, मुझसे वादा करो, कि इस भेद को किसि को नहीं बताओगी
मुझे कुछ नहीं मालूम
तुझे नहीं मालूम, तो किससे मालूम है
यहाँ बहर का कौन आदमी अया था जो उनके गले से मणि ले, क्या
तुम ने ही छिपायी वह मणि
नहीं, मैं कुछ नहीं जानती
तू बड़ी पतीव्रता बनती है, न
तो खा अपने पती को सौगंध
मैं अपनी सौगंध खाऊंगी, उनकी सौगंध क्यों खाऊं
वदी तु सच्ची है, तो तुझे खाना पड़ेगी क़सम

घर में मुरदा पड़ा है, उसकी कोई चिंता नहीं
सिर्फ हीरे-मोती-पन्ने की चिंता है
बड़े लोग, बड़ी दुनिया

क्या हूआ, बहू, गाय को दाना देते थे, आँख में आँसू
क्या करूँ, काका
पिताजी की याद आँखों में बंद हुआ बांध को तोड़ देती है, तो उसे रुक नहीं बती
बेटी, सेठजी थे ऐसे, उनकी हर बात को, प्यार सब अपने में बसा लो
काका, बचपन से लेकर बड़ी होने तक, पिताजी से मुझे माँ का प्यार मिला
लेकिन बहुत देर उसे भी वंचित कर दिया
ससूराल की सारी कड़वाहट को बाबूजी के प्यार ने भुला दिया
हे भगवान

नहीं बेटी, निराश मत हो
सेठजी का प्यार, त्याग, इस घर को अमृत देगा
तुम्हारी तपस्या में बड़ी शक्ती है, बड़ी शक्ती है