Jai Baba Pashupatinath #9

इतना दिन हो गया तेरा पिता का मृत्यु हुए
नागमणि की हवा तक नहीं लगने दी शर्दा ने
माँ, वह है तो घर में कहीं ही
कभी न कभी पता चले जाएगा

अभी तो वह पूजा में है
मालूम नहीं, इसने नागमणि कहाँ छिपा रखी है
इस सिंदूरदान में ज़रुर छिपाया होगा
हे भगवान, यह साँप कहाँ से आ गया

माँजी
हो गयी पूजा
हाँ, माँजी
बेटी, तू ने बहुत दिनों से सिंदूरदान से सिंदूर नहीं लगाया
सिंदूरदान से
हाँ
उसकी सुंदरता ही अलग है
आज लगाओ
ठीक है, अभी लगाती हूँ
इस सिंदूर की बात ही कुछ अलग है
कितनी सुंदर लग रही हो

छोटी मालकीन
यह दही कहाँ रख दूँ
दही, वहाँ रख दो
सुनो, रंभा
मुझे छोटी मालकीन मत कहा करो
क्यों न करूँ
क्योंकि मुझे इस घर में वह अधिकार नहीं मिला
जो अधिकार कोइ न्याय से नहीं देता, वह अधिकार उसे लड़कर लिया जाता है, छोटी मालकीन
मुझमें लड़ने की शक्ती नहीं है, रंभा
घर स्वामी उनकी दया पर पड़ी हूँ
वह जब चाहें निकाल दें
जब वह घड़ी आएगी मालकीन, तब आप अपने आपको आकेली नहीं पाएंगी
मैं चलती हूँ, मालकीन

हे तितली रानी, कहाँ जा रही है
रस चूसने जा रही है या रंग चुराने
रंभा, मूँ संभाल बोल कर
क्यों, सुई चुभ गयी
हवेली किस में अकेले अकेले किस से मिलने जा रही है
श्रीकांत का बाप मर गया उसका शोक मनाने जा रही हूँ
जब तेरा बाप मर गया माँ बेटी मिलकर कितने दिन शोक मनाया था
बक-बक करोगी तेरी जीभ खींच लुंगी
तै तै करेगी तेरी खोपड़ी को चोटी नोचकर पर रोटी बेल दूँगी, समझी
मेरा मर्द एक गाय का पूरा दूध मुझे पिलाता है
आँख में कजरौटा डालकर शोक मनाने आई है

श्रीकांत, इतनी जल्दी कहाँ जा रहे हो
कुछ काम है, माँ
कोइ काम-वाम नहीं है
बाप के मरने के बाद मनमानी कर लगे हो
दिन-रात घर से बाहर रहते हो
हर घड़ी मादिरा में चूर रहते हो
इस सब के ज़िम्मेदार आप लोग है
यह घर मुझे खाने की दौड़कर है
किस सुख के लिए मैं इस घर में हूँ
मुझे कुछ नहीं चाहिए, ले जाओ
बेटा थोड़ा जलपान कर ले
मुझे कुछ नहीं चाहिए, हटाओ
श्रीकांत, यह क्या किया तू ने
घृणा, घृणा जो इस के जीवन में भर दी गयी
श्रीकांत प्यारे, तू ने स्नेह चाहिए, जो तू इस घर में कभी नहीं मिल सकता
मैं तुम्हें दूंगी
चलो मेरे साथ

चण्डालिनी, अभी इक्कठा करने से क्या लाभ
तू न जाने किस मिट्टी से बनी हूई है
श्रीकांत तुझे देखना भी नहीं चाहता
फ़िर मैं तुझे रनी बनाकर इस घर में क्यों रखूं
चल, निकल जा, निकल जा मेरे घर से
नहीं माँजी नहीं, मुझे आपके चरणों पर जड़ी रहना दीजिए
आप लोगों के सीवा और मेरा कोई नहीं है
मुझे और कुछ नहीं चाहिए
मैं आप लोगों की सेवा किया करूंगी
और बस एक कोना में पड़ी रहूंगी
माँजी, दुर से उनके दर्शन कर ले करूंगी

अरे अभागिन, वह घर में रहेगा तभी तू दर्शन कर सकेगी
उर्वशी तूझसे सुंदर नहीं है, लेकिन उसे अपने प्रेम जाल में बंध रखा है
मैं तूझे एक अवसर और देती हूँ

उर्वशी तूझसे सुंदर नहीं है, लेकिन उसे अपने प्रेम जाल में बंध रखा है
उसे घर में ले आए किस के लिए वह दीवाना है
हाँ हाँ मैं उसे घर में लेकर आऊंगी किस के लिए वह दीवाना है
इसे बहाना में वह घर में रहेंगे

शर्दा, कहाँ जा रहे हो
यह घर छोड़ने से पहले, आपके बेटे को लाने के लिए
वह तुम्हे मिलेगा कहाँ
उर्वशी के पास

न जाना तुम कौनसा जादू कर दिया है
पल भर की छुड़ाई मुझे पागल बना देती है
मेरी भी यह हालत है उर्वशी
अपने होंठों की मदीरा पिलाकर, मुझे मदहोश कर दो
देखनेवाले पत्थर मरेंगे
क्यों
क्योंकि लोग यहाँ पर आते-जाते रहते हैं
मुझे किसि के परवाह नहीं
ज़रा हाथ तो बढ़ाओ
माँ से कहकर मैं इसी सप्ताह तुम्हारे साथ सात फ़ेर लूंगा
तुम्हारी माँ मानेगी
नहीं मानेगी तो हम मंदिर जाकर गंधर्व-विवाह कर ले

स्वामी
स्वामी क्या हो गया आपको
स्वामी
मेरे हाथ
हे भगवान, क्या हो गया मेरे पति को

वैद्यजी, इसका एक हाथ-पाँव क्यों नहीं चल रहा
बोलती हुई जीभ क्यों लड़खड़ा रही है
क्या हो गया है मेरे बेटे को

पक्षाघात हो गया है

पक्षाघात

वैद्यजी, ये अच्छा हो जाएंगे न

चाबीस घंटे के पश्चात, दवा का प्रभाव देखकर, ही कुछ कहा जा सकता हैं
यह दवा, शहद के साथ दे ठहरिए
मैं संत दास के साथ दूसरे दवाए भेजता हूँ
चलो, संत दास

वैद्यजी, मेरे बेटे को अच्छा कर दीजिए
मैं प्रयत्न करूंगा

हे प्रभु पशुपतिनाथ, मेरे स्वामी को अच्छा करना
उनकी सरी बिमारी मुझे दे दो
मेरे सुहाग की रक्षा करना प्रभु

वैद्यजी, अब कैसा है मेरा बेटा
दवा का थोड़ा भी प्रभाव नहीं हूआ
परंतु प्रयत्न नहीं छोड़ दूंगा
रोगी की अनुकूल वातावरण स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है

मन की अनुकुल वातावरण, वैद्यजी आप क्या कहाना
भगवान से प्रार्थना करो बेटी

अभागिन, जब से तू इस घर में आयी है, शांती चली गयी है
मेरा सुहाग उझड़ गया
और आज, मेरा बेटा अध मरा पड़ा हूआ है
न जाने तू किस जन्म का बदला लेने आयी है
अरे चुड़ैल, अपने भगवान से क्यों नहीं कहती को इसे ठीक कर दे
भगवान ही इनहें अच्छा करेंगे
चुप रह पापी
इसे अच्छा करना होता, तो बिमार ही क्यों करता

उर्वशी, उर्वशी

हाँ बेटा